Saturday, January 26, 2019

26 जनवरी की परेड से सम्बंधित 13 रोचक तत्थ

#26_जनवरी_की_परेड_से_संबंधित_13_रोचक_तथ्य

भारत में 26 जनवरी को एक राष्ट्रीय पर्व का दर्जा प्राप्त है. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन सन 1950 में हमारे देश में संविधान लागू किया गया था. इस दिन लगभग 2 लाख लोग गणतंत्र दिवस की परेड को देखने आते हैं. परेड के दौरान राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दिए जाने की प्रथा है. क्या आप जानते है कि 21 तोपों की यह सलामी 21 बंदूकों से नहीं, बल्कि भारतीय सेना की 7 तोपों से दी जाती है जिन्हें '25 पाउंडर्स' कहा जाता है. राष्ट्रगान शुरू होते ही पहली सलामी दी जाती है और ठीक 52 सेकंड बाद आखिरी सलामी दी जाती है.

परेड से कुछ दिन पहले ही इंडिया गेट और आसपास के क्षेत्र को एक अभेद्य किले में बदल दिया जाता है. परेड को सुचारू ढ़ंग से संचालित करने के लिए सेना के हजारों जवानों के अलावा कई अन्य लोग भी सक्रिय रूप से जुटे रहते हैं. परेड के आयोजन की औपचारिक जिम्मेवारी #रक्षा_मंत्रालय की होती है जिसमें कम से कम 70 विभिन्न संगठन उसकी मदद करते हैं.

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26 जनवरी की परेड से जुड़े 13 रोचक तथ्य
1. हम सभी को पता है कि हर वर्ष 26 जनवरी की परेड का आयोजन नई दिल्ली स्थित राजपथ पर किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि 1950 से लेकर 1954 ईस्वी तक परेड का आयोजन स्थल राजपथ नहीं था? इन वर्षों के दौरान 26 जनवरी की परेड का आयोजन क्रमशः इरविन स्टेडियम (अब नेशनल स्टेडियम), किंग्सवे, लाल किला और रामलीला मैदान में किया गया था. 1955 ईस्वी से राजपथ 26 जनवरी की परेड का स्थायी आयोजन स्थल बन गया. उस समय राजपथ को “#किंग्सवे” के नाम से जाना जाता था.

2. 26 जनवरी की परेड के दौरान हर साल किसी ना किसी देश के प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति/शासक को अतिथि के रूप में बुलाया जाता है. 26 जनवरी 1950 को आयोजित पहले परेड में अतिथि के रूप में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो को आमंत्रित किया गया था. जबकि 1955 में राजपथ पर आयोजित पहले परेड में अतिथि के रूप में पाकिस्तान के गवर्नर जेनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को आमंत्रित किया गया था.

#दक्षिण_अफ्रीका के पांचवें और वर्तमान
#राष्ट्रपति_मैटामेला_सिरिल_रामफोसा, भारत के 70 वें गणतंत्र दिवस 2019 के मुख्य अतिथि होंगे.

3. 26 जनवरी की परेड की शुरूआत राष्ट्रपति के आगमन के साथ होती है. सबसे पहले राष्ट्रपति के घुड़सवार अंगरक्षकों के द्वारा तिरंगे को सलामी दी जाती है, उसी समय राष्ट्रगान बजाया जाता है और #21_तोपों_की_सलामी_दी_जाती है. लेकिन क्या आप जानते है कि वास्तव में वहां #21_तोपों_द्वारा_फायरिंग_नहीं_की_जाती_है? बल्कि भारतीय सेना के 7 तोपों, जिन्हें “#25_पौन्डर्स” कहा जाता है, के द्वारा तीन-तीन राउंड की फायरिंग की जाती है.

रोचक बात यह है तोप द्वारा की जाने वाली फायरिंग का समय राष्ट्रगान के समय से मेल खाता है. पहली फायरिंग राष्ट्रगान के शुरूआत के समय की जाती है जबकि अंतिम फायरिंग ठीक 52 सेकेण्ड के बाद की जाती है. इन तोपों को 1941 में बनाया गया था और सेना के सभी औपचारिक कार्यक्रमों में इसे शामिल किया जाता है.

4. परेड के दिन परेड में भाग लेने वाले सभी दल #सुबह_2 बजे ही तैयार हो जाते हैं और #सुबह_3 बजे तक राजपथ पर पहुँच जाते हैं. लेकिन परेड की तैयारी पिछले साल जुलाई में ही शुरू हो जाती है जब सभी दलों को परेड में भाग लेने के लिए अधिसूचित किया जाता है. अगस्त तक वे अपने संबंधित रेजिमेंट केन्द्रों पर परेड का अभ्यास करते हैं और दिसंबर में दिल्ली आते हैं. 26 जनवरी की परेड में औपचारिक रूप से भाग लेने से पहले तक विभिन्न दल लगभग #600_घंटे तक अभ्यास कर चुके होते हैं.

5. परेड में शामिल होने वाले टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों तथा भारत की सामरिक शक्ति को प्रदर्शित करने वाले अत्याधुनिक उपकरणों के लिए इंडिया गेट परिसर के भीतर एक विशेष शिविर बनाया जाता है. प्रत्येक हथियार की जाँच एवं रंग-रोगन का कार्य 10 चरणों में किया जाता है.

6. 26 जनवरी की परेड के लिए हर दिन अभ्यास के दौरान और फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान प्रत्येक दल 12 किमी की दूरी तय करती है जबकि परेड के दिन प्रत्येक दल 9 किमी की दूरी तय करती है. पूरे परेड के रास्ते पर जजों को बिठाया जाता है जो प्रत्येक दल पर #200_मापदंडों के आधार पर बारीकी से नजर रखते हैं, जिसके आधार पर “#सर्वश्रेष्ठ_मार्चिंग_दल” को पुरस्कृत किया जाता है.

7. 26 जनवरी की परेड के शरूआत से लेकर अंत तक हर गतिविधि सुनियोजित होती है. अतः परेड के दौरान छोटी-से-छोटी गलती या कुछ ही मिनटों के विलम्ब के कारण भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

8. परेड में भाग लेने वाले प्रत्येक सैन्यकर्मी को चार स्तरीय सुरक्षा जाँच से गुजरना पड़ता है. इसके अलावा उनके द्वारा लाए गए हथियारों की गहन जाँच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके हथियारों में जिन्दा कारतूस तो नहीं है.

9. परेड में शामिल सभी झांकियां #5_किमी/घंटा की गति से चलती हैं ताकि गणमान्य व्यक्ति इसे अच्छे से देख सके. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन झांकियों के चालक एक छोटी सी खिड़की के माध्यम से वाहनों को चलाते है

10. परेड का सबसे रोचक हिस्सा “#फ्लाईपास्ट” होता है. इस फ्लाईपास्ट की जिम्मेवारी पश्चिमी वायुसेना कमान के पास होती है जिसमें #41_विमान भाग लेते हैं. परेड में शामिल होने वाले विभिन्न विमान वायुसेना के अलग-अलग केन्द्रों से उड़ान भरते हैं और तय समय पर राजपथ पर पहुँच जाते है

11. प्रत्येक गणतंत्र दिवस परेड में गीत “Abide with Me (#मेरे_पास_रह)” निश्चित रूप से बजाया जाता है क्योंकि यह महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत था.

12. परेड में भाग लेने वाले सेना के जवान स्वदेश में निर्मित “#इंसास (INSAS)” राइफल लेकर चलते हैं जबकि विशेष सुरक्षा बल के जवान ईजराइल में निर्मित “#तवोर (Tavor)” राइफल लेकर चलते हैं.

13. RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में 26 जनवरी की परेड के आयोजन में लगभग #320_करोड़ रूपये खर्च किये गए थे. जबकि 2001 में यह खर्च लगभग 145 करोड़ था. इस प्रकार 2001 से लेकर 2014 के दौरान 26 जनवरी की परेड के आयोजन में होने वाले खर्च में लगभग 54.51% की वृद्धि हुई है.